पंचगव्य चिकित्सा शिक्षा का अर्थ है - गोमाता के दूध, गोबर और गोमूत्र को मुख्य गव्य औषध तथा उपगव्य के रूप में दही, छाछ, माखन, घृत और भष्म से चिकित्सा. इसके साथ जैविक अनाज, फल, फूल और मसाले (वनस्पति औषध) का भी उपयोग किया जाता है. साथ ही दिनचर्या और पथ्य का विशेष ध्यान दिया जाने वाला चिकित्सा विधा है. साथ ही भारतीय रसोईघर जो विकृत हो चुका है, (अर्थात किचन में बदल गया है) मनुष्य जीवन में उसकी उपयोगिता को फिर से स्थापित करने की दिशा में शिक्षण कार्य तैयार किया गया है।

गव्यसिद्ध डॉक्टर की व्याख्या - गव्यसिद्ध डॉक्टर दूसरे डॉक्टरों से भिन्न हैं क्योंकि गव्यसिद्ध डॉक्टर केवल बिमारियों के लिए ही चिकित्सा सेवा प्रदान नहीं करते बल्कि रोगियों के कल्याण एवं उनकी मनः स्थिति को धयान में रखते हुए उच्चतम जीवन शैली की परिकल्पना के साथ बिना भेद – भाव के सेवाएं प्रदान करते हैं.


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